हमारी
प्रश्नवाचक निगाहें लगातार तिवारी जी पर जमीं हुईं थीं| इस बीच हमारा पान का एक
बीड़ा लग चुका था| उसे हमें पकडाते हुए वे बोले नहीं समझे न! पान की बीड़ा हमारे
मुंह में प्रवेश कर चुका था, हमने सर हिलाकर उन्हें बताया कि नहीं समझे| तिवारी जी
बोले, आज का अखबार नहीं पढ़ा? अब बारी हमारे शर्माने की थी| हम बोले पढ़ा तो है पर
आप किस खबर की बात कर रहे हो| तिवारी जी बोले, अरे वही, अहमदाबाद में लोग संतान
अपनी है या नहीं, पता लगाने के लिए डीएनए टेस्ट करा रहे हैं| हमें याद आ गया, हमने
कहा सच है तिवारी जी, अच्छा है बाकी देश में ऐसा नहीं हो रहा| रिपोर्ट तो यह है कि
इससे गुजरात में बहुत से परिवार टूट रहे हैं| तिवारी जी बोले वो तो टूटेंगे ही, पर
ये डीएनए टेस्ट में तो बहुत पैसा लगता होगा| हमने कहा, हाँ लगता तो है| कितना लगता
होगा, तिवारी जी ने पूछा? हमने कहा यही 10-11 हजार के आसपास| तिवारी जी बोले,
अच्छा आप ही बताओ सुकुल महाराज हमारे प्रधानमंत्री बोले रहीन कि उनकी रगों में खून
की जगह पैसा बहता है और बिज़नेस उनकी लहू में है| यह बात गुजरात के लोगों के समझ
में क्यों नहीं आ रही?
अचानक विषय
परिवर्तन से पूरी तरह चौंके हम, मुंह को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाये, ताकि पान की लार
कुर्ते पर न गिरे, तिवारी जी को ओर तकते
रहे| तिवारी जी बोले डीएनए टेस्ट से यही तो पता चलता है न कि औलाद हमारजादी है या
हरामजादी| हम भौंचक्के खड़े खड़े तिवारी जी को देख रहे थे| तिवारी जी बोले, अरे बिना
एको पैसा खर्च किये ये पता लगाने की विधी तो दिल्ली में साध्वी ज्योति बताईन हैं|
जोन उनकी पार्टी को वोट दी, सब रामजादे, बाकी..और वे मुस्करा दिए| हमने तिवारी जी
की तरफ देखा कि वे अपनी बात को और स्पष्ट करेंगे| पर वे तो अचानक आ गयी ग्राहकों
की भीड़ संभालने में व्यस्त हो गए थे|
अरुण कान्त
शुक्ला
9 दिसंबर,
2014
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