ले जाना कमलदास जी का श्रीमती जी के जन्मदिन पर भटा -
( लघु व्यंग्य)
जब मानसून पूरे देश में उफान पर है तो हमारा शहर कैसे छूटा रहता| पर, आज गनीमत थी कि 5 दिनों के बाद बारिश की बूंदों के बजाय सूर्यनारायण जी की कोमल कोमल किरणें बरस रहीं थीं| सुबह के करीब नौ बजे थे और हम अपने घर के सामने उन कोमल किरणों का अहसास अपने बदन को कराने के लिये गेट से सटकर सड़क के किनारे खड़े हुए ही थे कि सामने से कमलदास जी को हाथ में एक प्रसिद्ध मिठाई की दूकान का झोला हाथ में लटकाये आते देखा| झोले की साईज बता रही थी कि उसकी औकात मिठाई के 250 ग्राम से ज्यादा बड़े डिब्बे को समाने की नहीं थी| हमने कमलदास जी को बकायदा सुबह की गुड मार्निंग पेश करते हुए पूछ लिया कि क्या आज कोई फंक्शन है, सुबह सुबह मिठाई लेकर आ रहे हैं ! हमारा इतना पूछना भर था कि कमलदास जी भड़क उठे| बोले मिठाई तो नहीं है पर, मिठाई से कम भी नहीं है, भटा है ज़नाब| और, उन्होंने झोले से एक भटा निकाला और बोले 250 ग्राम का है, पूरे 25 रुपये का याने 100 रुपये किलो का| इसके पहले कि हम कोई और प्रतिक्रिया देते, उन्होंने भड़ास निकालते हुए कहा, भूल जाईये, भटे के भाव की पुरानी कहावत| अब राजनेता भटे के भाव बिकते हैं और भटा सोने के भाव…हमने बात को हल्का करने की कोशिश करते हुए कहा कि दरअसल वो क्या है कि आपके हाथ में मिठाई का थैला देखकर सोचा कि शायद आज घर में किसी का जन्मदिन होगा और इसीलिये आप सुबह सुबह मिठाई ले जा रहे हैं| कमलदास जी फिर उखड़े, बोले आपको 100 रूपये किलो का भटा मिठाई से कम लगता है क्या? अब हमारे सामने उनकी बात का समर्थन करने के अलावा कोई चारा नहीं था सो हमने बड़ी गंभीर मुद्रा बनाकर समर्थन में मुंडी हिलाई तो, वे बोले, दरअसल, आज श्रीमती जी का जन्मदिन है और उन्हें भटे का भर्ता बहुत पसंद है तो मैंने सोचा मिठाई की जगह भटा ही ले चलता हूँ | शाम को छोटी सी पार्टी रखी है, आप भी आईयेगा, भर्ते का मजा लेने| और, वे बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ गये| अब वे किसे कोस रहे थे, पता नहीं, हमें कि हम क्यों सुबह सुबह टकरा गये या….
अरुण कान्त शुक्ला
18अगस्त 2024